पशुपालन करने वालो की आय को दोगुना कर सकती है WE STOCK की मशीन

पशुपालक अक्सर पशु की उत्पादन क्षमता और उसकी सेहत को लेकर फिक्रमंद रहते हैं और रहे भी क्यों न। हर साल देश में न जाने कितनी गाय और भैंस सही समय पर बीमारी के न पता चलने की वजह से जान गंवा देती हैं। ऐसे में पशुओं की देखभाल सही तरह से कैसे की जाए, ये सवाल सभी को परेशान करता है। लेकिन अब और नहीं, इस समस्या का अंत अब हो गया है।

 दरअसल भारत की ही एक ब्रेनवायर्ड नाम की कंपनी ने एक ऐसी तकनीक खोज ली है। जिससे गाय की सेहत से जुड़ी हर छोटी बड़ी जानकारी आपको मिल जाएगी। आज हम आपको अपने इस लेख और वीडियो में इसकी जानकारी देंगे। अगर आप भी अपनी गाय की सेहत और उसकी उत्पादकता की जानकारी समय – समय पर प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारी इस वीडियो को अंत तक देखें।

क्या है ये मशीन

आपको बता दें कि केरल के दो युवाओं ने इस मशीन को बनाया है। इस मशीन को वी स्टॉक का नाम दिया है। इस मशीन के दो हिस्से हैं। जिनमें से एक पशु के कान पर लगता है और ये पशु के जबड़े के जरिए पशु की सेहत हीट साइकिल, सेहत आदि का पता लगाता है। इसके बाद मशीन का दूसरा हिस्सा किसी रिसीवर की तरह काम करता है। ये रिसीवर पशु फार्म पर लगाया जाता है। एक पशु फार्म पर केवल एक रिसीवर से ही बहुत सी गाय की जानकारी संग्रहित की जा सकती है। 

वी स्टॉक की ऐप 

जब मशीन पशु की जानकारी एकत्रित कर लेती है और रिसीवर तक पहुंचा देती है। इसके बाद पशु की सारी जानकारी इस मशीन के लिए मुहैया कराई गई ऐप पर दिखाई देने लगती है। इस ऐप पर पशु की हीट साइकिल से लेकर पशु के पूरी दिनचर्या और खानपान की जानकारी भी मिल जाती है। इस ऐप पर हर 10 सेकंड में जानकारी अपडेट होती है। जिसकी वजह से पशुपालक को पता चलता रहता है कि पशु ठीक है या नहीं। 

वी स्टॉक मशीन के फायदे 

ये मशीन एक ऐसी पहल है जिसके जरिए लाखों पशुओं को मौत से और गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है। यही नहीं वी स्टॉक के जरिए पशुओं की हीट साइकिल का पता समय पर चल जाता है। जिसकी वजह से गाभिन समय पर कराया जा सकता है। जब पशु का गर्भाधान समय पर नहीं हो पाता तो ऐसे में उसकी हीट साइकिल 25 दिनों के बाद आती है। इस स्थिति में पशु को काफी आर्थिक नुकसान होता है। लेकिन इस मशीन से इस स्थिति से बचा जा सकता है और पशु को समय पर गाभिन कराया जा सकता है। 

वी स्टॉक मशीन की कीमत 

अगर आप के पशु के लिए इसे खरीद रहे हैं तो इसके लिए आपको 4500 रुपए खर्च करने होंगे। लेकिन अगर आप अधिक पशुओं के लिए ये खरीद रहे हैं तो आपको रिसीवर केवल एक ही चाहिए होगा और कान में लगने वाली मशीन पशु जितनी ही खरीदनी होगी। केवल कान में लगाई जाने वाली ये मशीन 1500 रुपए में आपको मिल जाएगी। 

कहां से ले ये वी स्टॉक मशीन 

इस मशीन को खरीदने के लिए आपको इस कंपनी की साइट पर जाकर संपर्क करना होगा। इसके लिए गूगल पर ब्रेनवायर्ड सर्च करना होगा। इसके बाद कंपनी की साइट आपको दिख जाएगी। यहां जाने के बाद आपको कंपनी से संपर्क कर के मशीन खरीद सकते हैं। 

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Aquaponic तकनीक से खेती का तरीका, खर्च और फायदे

आज के आधुनिक युग में सब कुछ तकनीक के माध्यम या मॉडर्न तरीके से किया जा सकता है। ऐसा ही एक मॉडर्न तरीका खेती के लिए उपयोग में लिया जा रहा है। ये एक ऐसा तरीका है जिसके जरिए फसल दो से तीन गुना तेजी से बढ़ने लगती है। हम बात कर रहें है Aquaponic Technology के बारे में। ये एक ऐसी तकनीक है जिसमें न तो अधिक भूमि की जरूरत है और न ही खाद, फर्टिलाइजर और कीटनाशकों की। इस तकनीक में मिट्टी का उपजाऊ होना भी जरूरी नहीं है। 

यानी कि ये तकनीक पूरी तरह से पानी पर ही काम करती है। आज हम आपको एक्वापोनिक तकनीक से खेती करने का तरीका भी बताएंगे। इसके अलावा एक्वापोनिक तकनीक में कितना खर्च आ सकता है और इसके जरिए कितनी आय अर्जित की जा सकती है। इसके बारे में भी बताएंगे। अगर आप एक्वापोनिक तकनीक से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो आप हमारे इस लेख और वीडियो पर अंत तक बने रहें। 

क्या है एक्वापोनिक तकनीक 

एक्वापोनिक दो शब्दों के जोड़ से मिलकर बना है। इसमें पहला शब्द है एक्वा और दूसरा है पोनिक। एक्वा का अर्थ होता है पानी। वहीं पोनिक का अर्थ होता है बढ़ना। इसे जोड़ें तो पानी के माध्यम से बढ़ना या ग्रो करना। इस तकनीक में किसान भाई खाद के तौर पर मछली के मल से भरे हुए पानी का उपयोग करते हैं। इस एक्वापोनिक तकनीक में मछली के कंटेनर या टब को फसल से जोड़ा जाता है। इसके बाद मछली के मल वाला पानी फसल तक पहुंचकर उन्हें पोषक तत्व देता है। चलिए विस्तार से समझते हैं इस तकनीक के बारे में। 

एक्वापोनिक तकनीक कैसे काम करती है 

इस तकनीक के लिए आपको कुछ अलग – अलग चीजों की जरूरत पड़ती है। इस तकनीक को हम आपको कुछ चरणों में समझाते हैं। चलिए शुरू करते हैं पहले चरण से। 

सबसे पहले एक्वापोनिक तकनीक से खेती करने के लिए आपको कुछ बड़ी टंकी ये कंटेनर चाहिए होते हैं। इस कंटेनर के अंदर आपको मछलियां रखनी होती हैं और उन्हें समय – समय पर अधिक मात्रा में आहार देना होता है। इसी कंटेनर के अंदर आपको वॉटर पंप रखना होता है जो इस पानी को फसलों तक पहुंचाने का काम करता है। 

अब वाटर पंप से निकला हुआ पानी पूरी फसल तक पहुंचे। इसके लिए आपको एक ऐसी फिटिंग करानी होती है। जिससे फसल तक पानी पहुंचकर अंत में घूमकर वापस मछलियों के वाटर कंटेनर में आ जाए। 

फसल की बेहतर उपज के लिए उनकी जड़ों का हिस्सा पानी में रहता है और ऊपरी हिस्सा हवा में रहता है। फसल को आधा पानी में रखने के लिए एक बोर्ड और कुछ ऐसे प्लास्टिक के पॉट्स की जरूरत होती है, जो नीचे से थोड़े खुले हों ताकि उसमें पानी जा सके और जड़ों को पोषक तत्व मिल सकें। 

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान फसल को पोषक तत्व मिल जाते हैं और फसल पानी से पोषक तत्व ले लेते हैं। इसके बाद फिल्टर हुआ पानी वापस मछलियों के कंटेनर में चला जाता है। इसी तरीके से ये एक्वापोनिक खेती की जाती है। 

फसल को पोषक तत्व कैसे मिलते हैं

साधारण खेती में फसल को पोषक तत्व फर्टिलाइजर और खाद के जरिए मिलते हैं। वहीं इस तकनीक में जब मछलियों को अधिक मात्रा में अच्छा आहार दिया जाता है, तो आहार के अंदर जो  पोषक तत्व होते हैं। वो मछलियों के मल में भी मिल जाते हैं। अब ऐसे जब ये मल वाला पानी फसल तक पहुंचता है तो फसल को जरूरी पोषक तत्व इसी के जरिए मिल जाते हैं। वहीं इसके साथ ही पानी भी अपने आप ही फिल्टर हो जाता है। 

एक्वापोनिक तकनीक से खेती करने के फायदे 

इस तकनीक के जरिए फसल 2 से 3 गुना तेजी से बढ़ती है। जिसके जरिए किसान भाई अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। इसके इस तरह की खेती में मौसम का बदलना भी उतना असर नहीं डालता।  इसके अलावा ये तकनीक कम भूमि पर भी आजमाई जा सकती है। इसके जरिए किसान भाइयों को पता चल जाता है कि ये तकनीक उनके लिए कारगर है या नहीं। 

फसल के बढ़ने के अलावा किसान भाई मछलियों को बेचकर भी पैसा कमा सकते हैं। ऐसा बड़े स्तर पर बहुत से किसान कर रहे हैं। इस खेती के जरिए ऐसे कई किसान है जो साल में 5 करोड़ रुपए तक कमा रहे हैं। 

एक्वापोनिक में खर्च 

इस तकनीक के जरिए खेती करने में 5 लाख से अधिक तक का खर्च आ सकता है। ऐसे में हर किसान इस तकनीक के जरिए खेती कर पाए, ये कहना संभव नहीं है। लेकिन ये पूरी तरह फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि इस तकनीक का एक बार का निवेश किसान भाई को जिंदगी भर कमाई करा सकता है। 

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जानिए इस Muck Spreader Machine के फायदे, कीमत और उपयोग के तरीके।

भारत देश एक कृषि प्रधान देश है। लेकिन बावजूद इसके हमारे देश में खेती से जुड़ी कई समस्याएं हैं जिनका समाधान अब भी खोजा रहा है। ऐसी ही एक समस्या है जिसका समाधान हाल ही में निकाला गया है। हम बात कर रहे हैं खेतों में फर्टिलाइजर और खाद फैलाने के बारे में। इस काम में किसान भाइयों का समय और पैसा दोनों ही खर्च होता है।

लेकिन अब इस समस्या को वो मक स्प्रेडर मशीन के जरिए खत्म कर सकते हैं। इस मशीन का इस्तेमाल न केवल बहुत सरल है। बल्कि इसके जरिए 15 लोगों को काम महज 4 मिनट के अंदर – अंदर किया जा सकता है। आज हम आपको अपने इस लेख और वीडियो में इसी मशीन के बारे में बताने वाले हैं। इस मशीन से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए आप इस लेख पर अंत तक बने रह सकते हैं। 

कैसे काम करती है फर्टिलाइजर और खाद स्प्रेडर मशीन 

इस मशीन को ग्रीन लैंड एग्रो नाम की एक कंपनी ने बनाय़ा है। ये मशीन ट्रैक्टर से अटैच होकर काम करती है। ये मशीन देखने में ट्रेली की तरह है। इसके बाहरी ओर बड़ी गोलाकार रोड लगी हैं और उन पर कुछ ब्लेड लगे हैं। इनके पीछे एक हाइड्रोलिक गेट है। जिसे ड्राइवर रिमोट के जरिए खोल सकता  है। जैसे ही ये गेट खुलता है तो ये गोलाकार रोड और इस पर ब्लेड घूमने लगते हैं। जिससे ट्रेली में रखी गई खाद और फर्टिलाइजर तेजी से खेत में दूर तक फैलने लगता है। 

Muck Spreader Machine की क्षमता 

इस मशीन में एक समय पर 150 स्क्वैर फुट माल भरा जा सकता है। वहीं इस माल को जमीन पर खाली करने में महज 4 मिनट का ही समय लगता है। ये मशीन उन सभी लोगों के लिए एक उम्मीद बन सकती है जिन्हें समय पर लेबर या काम करने वाले लोग नहीं मिलते। 

मशीन का फायदा 

ये मशीन महज 4 मिनट में उतना काम कर देती है। जितना 15 लोग दिनभर में करते हैं। इसके इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा है समय की बचत। वहीं अगर बात करें खर्च की तो इसके जरिए 15 लोगों को दी जाने वाली ध्याड़ी को कम किया जा सकता है। ये एक बारी का निवेश है। जिसे किसान भाई लंबे समय तक इस्तेमाल कर सकते हैं। 

Muck Spreader की कीमत 

ये मशीन आप गुजरात से मंगवा सकते हैं। इस मक स्प्रेडर मशीन की कीमत करीब 6 लाख रुपए हैं। इस मशीन को खरीद कर बड़े जमींदार छोटे किसानों को किराए पर भी दे सकते हैं। इससे मशीन पर खर्च की गई राशि को जल्दी ही वापस पाया जा सकता है। 

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गोबर से ईंट बनाकर कमा सकते हैं करोड़ों रुपए। जानिए गोबर से ईंट बनाने की विधि।

किसान और पशुपालन से जुड़े लोगों की आय बढ़ाने और उन्हें बल देने के लिए आए दिन सरकारें अपने स्तर पर काम करती रहती हैं। लेकिन फिर भी किसानों और पशुपालकों की आय में कुछ खास इजाफा नहीं हो रहा है। लेकिन कहते हैं न कि जहां चाह वहां राह। ऐसी ही एक चाह ने कुछ ऐसा करिश्मा कर दिखाया, जिसके जरिए पशुपालक भाई साल के 12 महीने गोबर से ही पैसा कमा सकते हैं।

हम गोबर के जरिए कोई दिए, प्लेट या फिर खाद बनाने की बात नहीं कर रहे। बल्कि हम बात कर रहे हैं गोबर के जरिए ईंट बनाने की। ये सुनने में जितना अजीब है, इस पर विश्वास करना उतना ही मुश्किल है। लेकिन ये सच है और आज के इस लेख और वीडियो में हम आपको बताएंगे कि गोबर की ईंट किस तरह बनाई जाती है और इसके क्या फायदे एवं नुकसान हो सकते हैं। 

किस पशु के गोबर से बन सकती है ईंट 

ऐसे किसान या पशुपालक भाई जो अपने घरों में गाय और बैल पालते हैं, वो गोबर से ईंट तैयार कर सकते हैं। इस तकनीक की खोज करने वाले डॉक्टर शिव दर्शन ने गोबर के जरिए न केवल ईंट बल्कि कई दूसरी चीजें भी तैयार की हैं जैसे गोबर की ईंट को चिपकाने वाला मसाला, प्लास्टर, मड फ्लोरिंग और छत बनाने की वस्तु आदि।

गोबर की ईंट का फायदा 

किसान और पशुपालक भाइयों को बता दें कि गोबर की ईंट से न केवल आर्थिक लाभ होगा। बल्कि इसके जरिए कार्बन के उत्सर्जन को भी कम किया जा सकता है। बताया जाता है कि एक घर के निर्माण की वजह से करीब 20 हजार किलो कार्बन उत्सर्जित होता है, जो प्रदूषण को बढ़ाने का काम करता है। 

वहीं अगर बात करें गोक्रीट के जरिए बने घर की, तो इसमें जरा भी कार्बन उत्सर्जित नहीं होता। यही नहीं गोबर इकलौती ऐसी चीज है जो पशुपालक रोजाना प्राप्त कर सकता है। अगर बात करें कि एक बैल या गाय के गोबर से कितनी ईंट सालाना बनाई जा सकती है, तो बता दें कि एक 3 कमरों के घर के लिए जितनी ईंट की जरूरत होती है, उतनी ईंट गाय के गोबर से बनाई जा सकती है। 

गोबर के गुण से ईंट कैसे 

गाय के गोबर के अंदर ऐसे कई गुण होते हैं जो उन्हें ठोस और लंबे समय तक मजबूत रख सकते हैं। डॉक्टर शिवदर्शन के मुताबिक गाय के गोबर में एंजाइम, प्रोटीन, डेड सेल, नाइट्रोजन, फाइबर जैसे तत्व पाए जाते हैं। ऐसे में जब ये गुण मिट्टी से मिलते हैं तो किसी प्लास्टिक के जोड़ की तरह काम करते हैं  और इससे मजबूत ईंट तैयार हो जाती है। 

मिट्टी के घर कितने समय तक टिक सकते हैं 

देश के ग्रामीण इलाकों में आज भी बहुत से घर मिट्टी के जरिए ही बने हुए हैं। इन घरों की अवधि देखें तो मालूम होता है कि ये लगभग 200 से 300 साल पुराने तक भी हैं। यही नहीं विश्व हेरिटेज में शिवम नाम के शहर की कुछ ऐसी इमारतों का जिक्र भी किया गया है, जो मिट्टी के जरिए ही बनी है और इनका निर्माण आज से पहले 15वीं 16वीं शताब्दी के समय पर हुआ था। यानी इस आधार पर कहा जा सकता है कि मिट्टी के जरिए बनी इमारते लंबे समय तक रह सकती हैं।

मिट्टी से जुड़ा वैज्ञानिक तथ्य 

ऐसे कई अध्ययन हो चुके हैं, जो बताते हैं कि दुनिया में मौजूद हर वस्तु या धातु समय के साथ अपनी ऊर्जा और क्षमता खोने लगती है। उदाहरण के तौर पर देखें तो जैसे लोहे को जंग लगता है और वो मिट्टी में तब्दील हो जाता है। ऐसा ही कुछ हाल होता है लगभग दूसरी धातुओं का लेकिन जब बात मिट्टी की आती है, तो वो हमेशा एक न्यूट्रल स्टेट में रहती है। यानी उसकी ऊर्जा और क्षमता कम नहीं होती। इस वैज्ञानिक तथ्य के आधार पर भी कहा जा सकता है कि मिट्टी और गोबर से बनी ईंट मजबूत हो सकती हैं। 

गोबर की ईंट बनाने का तरीका 

सबसे पहले इस ईंट को तैयार करने के लिए गाय या बैल का गोबर चाहिए और इसके साथ तालाब या गांव की मिट्टी और चूने की जरूरत पड़ती है। 

  • गोबर 24 घंटे से पुराना नहीं होना चाहिए। 
  • इसमें 70 से अधिक ईंट तैयार करने के लिए आपको 100 किलो गोबर, 50 किलो मिट्टी और 6 किलो चूने की जरूरत होती है। 
  • वहीं अलग – अलग स्थानों के हिसाब से ईंट में कुछ और सामग्री जोड़ी जा सकती है। जो सामग्री आपको बताई गई है ये राजस्थान या कम वर्षा वाले क्षेत्र के लिए उपयुक्त है। 
  • इन तीनों चीजों को अच्छी तरह से मिलाकर गूंथ लिया जाता है। इसके बाद इन्हें 15 दिन तक धूप में सुखाया जाता है। ध्यान रहे कि इसमें पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। 
  • इस तरह ये ईंट तैयार हो जाती हैं। 

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जानिए किस घरेलू कचरे से बनाया जा सकता है फर्टिलाइजर (उर्वरक)

हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है। लेकिन आज भी किसानों की आर्थिक हालत बेहद खराब है। ऐसे में किसानों की आय को बढ़ाने और उनकी जेब पर पड़ने वाले भार को कम करने के लिए हम एक खास तरकीब लेकर आए हैं। हम सभी जानते हैं कि किसान खेतों में बेहतर फसल के लिए अक्सर फर्टिलाइजर या उर्वरक का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यही फर्टिलाइजर किसानों को 1000 रुपए किलो तक पड़ता है। ऐसे में अगर घर के कचरे से फर्टिलाइजर तैयार किया जाए तो न केवल ये किसानों के पैसे बचेंगे। बल्कि इससे कचरे का सही उपयोग भी होगा। 

आज हम आपको इसी बारे में बताने वाले हैं। घबराइए नहीं इसके लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की भी जरूरत नहीं है। ये तरीका किसानों के सालाना हजारों रुपए तक बचा सकता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि घर के कचरे से कैसे फर्टिलाइजर या उर्वरक बना सकते हैं, तो इसके लिए हमारे लेख पर अंत तक बने रहें या हमारी वीडियो को अंत तक देखें।

क्या करता है फर्टिलाइजर 

फसल के लिए फर्टिलाइजर ठीक वैसे ही काम करता है जैसे कि इंसानों के लिए पोषक तत्वों से भरा खाना। इस फर्टिलाइजर के जरिए फसल को पोषक तत्व मिलते हैं और फसल की ग्रोथ बहुत तेजी से होती है। बिना फर्टिलाइजर के फसल के खराब होने की संभावना भी बेहद बढ़ जाती है। कुल मिलाकर फर्टिलाइजर खेती के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है। ऐसे में इसे किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 

कचरे से फर्टिलाइजर क्यों 

देश के अलग – अलग हिस्सों में आपने कूड़े के बड़े – बड़े पहाड़ देखे होंगे। ये पहाड़ न केवल प्रदूषण को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। बल्कि इन्हीं पहाड़ों की वजह से इसके आस पास रहने वाले लोगों का सांस तक लेना मुश्किल हो गया है। ऐसे में घरेलू कचरे का उपयोग करके कूड़े को फैलने से भी रोका जा सकेगा और इसके जरिए मिट्टी को उपजाऊ भी बनाना संभव होगा।

फर्टिलाइजर के  लिए कौन सा कचरा

  • प्याज के छिलके
  • अंडे के छिलके
  • इस्तेमाल की गई चाय पत्ती

इस सामग्री के गुण और फायदे 

  • चाय की पत्ती के अंदर क्लोराइड, सल्फेट, टोटल फॉसफोरस, ऑर्गेनिक मैटर, कैल्शियम, और मैग्नीशियम होता है। पत्ती के यही गुण फसल को तेजी से फलने फूलने में सहायता करते हैं फसल की गुणवत्ता को निखारते हैं। 
  • प्याज के छिलके आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कॉपर का एक अच्छा स्रोत हैं। ये फल और सब्जियों के अंदर पाए जाने वाले पोषक तत्वों की मात्रा को तेजी से बढ़ाने का काम करते हैं। 
  • अंडे के छिलके  अमूमन हम अक्सर फेंक देते हैं. लेकिन इसके छिलकों में मौजूद कैल्शियम फसल या पौधे की ग्रोथ में एक अहम भूमिका निभाता है। कैल्शियम इंसानों या पशु की तरह फसल के लिए भी जरूरी होता है और यही अंडे के छिलके फसल को कैल्शियम मुहैया कराते हैं। ये जड़ों को मजबूत करते हैं फल सब्जियों में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ाते हैं। 

फर्टिलाइजर बनाने की विधि 

  1. सबसे पहले आप अंडे के छिलके को मिक्सर ग्राइंडर के जरिए पीस लें। 
  2. इसके बाद एक बड़े बर्तन या तसले में इस्तेमाल की गई चाय पत्ती और प्याज के छिलके डाल दें। 
  3. अब पिसे हुए अंडे के छिलकों को इसमें डाल दें और अच्छी तरह किसी चम्मच या अन्य किसी चीज के जरिए मिला लें। 

जब यह अच्छी तरह मिल जाए तो इसे अपनी फसल के आस पास की जगह पर डाल दें और मिट्टी के साथ मिला दे। इस तरह आप फर्टिलाइजर बना भी पाएंगे और कचरे को इस्तेमाल में भी ले पाएंगे। 

सामग्री अधिक मात्रा में कैसे एकत्रित करें 

अब ज्यादातर किसानों को यही चिंता सता रही होगी कि प्याज के छिलके, अंडे के छिलके और इस्तेमाल की गई इतनी सारी चाय पत्ती कहां से आएगी। आपको बता दें कि ये सारी सामग्री आप अपने आस पास के रेस्टोरेंट, ढाबे या चाय की ठेली और अंडे की ठेली से एकत्रित कर सकते हैं। 

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